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Sunday, 3 April 2016

क्रोध

क्रोध का स्फुलिंग मात्र मानवों को नष्ट करे।
दुर्प्रभाव क्रोध का, हमारा मार्ग-भ्रष्ट करे ॥  
अग्नि से उत्पन्न धूम्र अन्धकार प्रकट करे ।
इस परिस्थिति में कर्म सबके लिए संकट करे ॥

क्रुद्ध मनु हर समय शैतान के अधीन रहे ।
घृणा-द्वेष की नदी, उसके भीतर से बहे॥
उसके राज्य के समय में हमसे पाप होता है ।
त्रुटि के बोध के पश्चात  पश्चाताप होता है ॥
अतः क्रोध यदि भूल से भी मन में आगमन करे ।
तो धैर्य का दिव्यास्त्र दुष्ट दैत्य का दमन करे ॥

Friday, 25 March 2016

वर्तमान जीवन

इस जीवन में मनःशान्ति का अभाव है। 
एवं तनाव और तृष्णा का प्रभाव है॥ 
यह विश्व अविरल दौड़ में व्यस्त है। 
यह समाज अभी अवसाद-ग्रस्त है॥ १ ॥ 

हम अपनी वास्तविकता से अपरिचित हैं।
खोखले लक्ष्यों पर आधारित, हमारी जीवन-रेखा रचित है॥ 
समय-सरिता का वेग हमें अंध-कूप में धकेल है। 
शंकाओं का राक्षस हमारे साथ खेल खेल रहा है॥ २ ॥ 

जगत की भूल-भूलैया में यह मानव भटक रहा है। 
जीवन के लघु-सुखों पर इसका दिल अटक रहा है॥ 
सत्य का द्वार अभी हमारे अप्रत्यक्ष है। 
तमस-रजस का दुर्ग, अभी हमारे समक्ष है॥ ३ ॥ 

आत्म-दर्शन संभव करेगा, घोर तिमिर में प्रकाश। 
फिर उचित परिश्रम लाएगा, नील असीम आकाश॥ 
ज्ञान एवं विवेक से हमें प्रचुर बल मिलेगा। 
एवं सभी दुविधाओं का उपयुक्त हल मिलेगा॥ ४ ॥      


      
         

Thursday, 31 December 2015

नववर्ष

यह वर्ष अपने साथ लाएगा नए-नए रंग । 
प्रार्थना है कि जीवन में बहे उल्लास की तरंग ॥ 
स्वेच्छा है कि हर्ष-गीत की लय ना हो भांग ।
और आप सभी सदैव रहें मेरे संग ॥ १ ॥ 

इस वर्ष, मैं सुधारूंगा अपना व्यक्तित्व । 
ताकि सतोगुण का रहे चिर स्थायित्व ॥ 
आलस्य का मिट जाए अस्तित्व । 
एवं प्रबल करूंगा अपना पुरुषत्व ॥ २ ॥ 

मिट जाएगा चरित्र से क्लेश | 
हट जाएगा ह्रदय से द्वेष ॥ 
प्रसारित होगा प्रेम का सन्देश । 
ताकि प्रसन्न हो सर्वज्ञ सर्वेश ॥ ३ ॥ 

आप सभी को नववर्ष का हार्दिक अभिनन्दन। 
कृपया स्वीकारें मेरा स्नेहमय आलिंगन ॥ 
ईश्वर से है मेरा यही सविनय निवेदन । 
कि हमारी मनोकामनाएँ हो जाएँ संपन्न ॥ ४ ॥ 

Sunday, 6 December 2015

जय युद्धवीर


  

वीर योद्धा ले प्रतिज्ञा मातृ-भूमि त्राण की,
 सहर्ष वो प्रदान करे आहुति प्राण की ।  
आश्वस्त करे वो देश-रक्षा, यही परम संकल्प है, 
अभयपूर्वक उसने चुना, मृत्यु का विकल्प है ॥ १ ॥ 

सिंह-शक्ति सैन्य की, वो वीरता का चिह्न है ,
नृप के शस्त्र और प्रयत्न वन में अर्थहीन हैं । 
मेघ-गर्जन-चक्रवात, ये आपदा निष्प्राण है,
क्योंकि शूर एक सूर्य-तेज का बाण है ॥ २ ॥ 

भारत लक्ष्य शत्रु का, कभी भी वो प्रहार करे ,
पर वज्र-शक्ति योद्धा की, सदैव अरि-संहार करे । 
हिमगिरी का दुर्ग वैरी-दल के लिए अभेद्य है ,
क्योंकि समरवीर शौर्य का कवच अछेद्य है ॥ ३ ॥ 

वसुधैव-कुटुम्बकम की रीति भारत-देश की , 
किसी के भी प्रति नहीं, भावनाएं द्वेष की । 
किन्तु जो मुर्ख, माँ के मान पर स्वदृष्टि-पात का पाप करे , 
प्रचंड वीर सुत को देख, वो अंत में विलाप करे ॥ ४ ॥ 

शूरवीर उदार-रूप शान्ति के समय दिखाए,
वीर का करुण व्यवहार उसको लोकप्रिय बनाये । 
रणवीर युद्ध के समय, शत्रुओं को निराश करे,
उसका भीष्म काली-रूप, दैत्यों का विनाश करे ॥ ५ ॥    

सगर्व-गान जय-जवान-मंत्र का सज्जन करे , 
वीर को नमो:-नमन, भारती सर्वजन करे। 
समाज का कर्त्तव्य है कि वीर-बलि वृथा न जाए,

वो देश-विकास में हाथ दे, और भू को श्री-निवास बनाये ॥ ६ ॥

॥ जय हिन्द ॥   ॥ भारत माता की जय ॥           

Tuesday, 29 September 2015

ताज महल

ताज महल मुग़ल- प्रताप- प्रतीक भारतवर्ष में ।
ताज का सुन्दर दृश्य देख, भरता हृदय हर्ष से ॥ 
ताज महल आगरा नगर का अभिमान है । 
विश्व का कोई भी स्थान, नहीं इसके सामान है ॥ १ ॥

श्वेत-रंग ताज का, पवित्र- प्रेम का सूचक है । 
शाहजहाँ - मुमताज़- प्रेम, प्रत्येक ईंट में स्थित है ॥
गगनचुम्बी गुम्बद और मीनारों का दृश्य रोमांचक है । 
श्वेत-प्रांजल- ताज से, विश्व आश्चर्यचकित है ॥ २ ॥ 

चारबाग़ चार-चाँद ताज महल पर लगाते । 
विशाल-सुर्ख-द्वार भव्य- ताज का सुन्दर रूप दिखाते ॥ 
अतुल्य ताज के समक्ष, लघु लगे चन्द्र की महिमा । 
अनन्य ताज महल है, भारत देश की गरिमा ॥ ३ ॥  
           

Saturday, 19 September 2015

वर्तमान समाज

समाज निवास असत्य का, भ्रष्टता का मान है। 
नृशंसता का काल है, घृणा-भाव प्रधान है॥ 
रक्त-पात निश्चित है , हिंसा विद्यमान है। 
वर्तमान काल में, पाप वर्धमान है ॥ १ ॥  


स्वार्थी- जन उपस्थित हैं, तामस प्रवाहमान है।  
अल्पज्ञ मूर्ख हर-ओर हैं, जिनको अभिमान है  ॥ 
धूर्त-मुनि मंत्र जपे, शास्त्र का अपमान है। 
वर्तमान काल में, पाप वर्धमान है ॥ २ ॥ 

किन्तु ऊर्जा सुनीति की और सत्य शक्तिमान है ।  
ईश्वर के आशीष से, दृढ़ पुरुष बलवान है॥ 
असत का अंत, दैत्य-दहन, हम सभी का काम है । 
पाप वर्धमान है, पर पाप नाशवान है  ॥ ३ ॥ 
  

Saturday, 12 September 2015

गणित-गौरव

विज्ञानराज कलावती गणित विषय महान है,
निर्माण-कार्य में गणित की भूमिका प्रधान है।
गणित मनुष्य मित्र है और जीवन का आधार है,
दिवस निर्विघ्न बीत जाए गणित पर इसका भार है ॥ १ ॥

गणित तर्क-पूर्ण है, और मनो-विकास करे,
जहाँ वो वास करे वहाँ समस्या शीघ्र निकास करे।
गणित प्रदान करे विचार-नीति और श्रेष्ठ पथ,
गंतव्य तक ले जाने वाला है वो एक सुन्दर रथ ॥ २ ॥

यदि ध्यान से देखें तो, गणित में दर्शन-ज्ञान है,
परस्पर समीकरण ठीक करें, तो हर कार्य आसान है,
जीवन एक अनुवृत्त है, जो आरोही और अवरोही है,
अतः सुखी वही व्यक्ति है, जो सदा निर्मोही है ॥ ३ ॥

विश्व को समझने हेतु गणित-ज्ञान अनिवार्य है,
 रहस्यों पर प्रकाश डालना यही इसका कार्य है।
गणित विषय असीम है, अतः गणित महान है,
वो उन्नति संभव करे, अतः उसका सम्मान है ॥ ४ ॥