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Friday, 21 August 2015

शिक्षा का सूर्योदय

नई सुबह, नया सवेरा,
शिक्षा के सूर्य से अब घर-घर होगा,
सुख और शांति का बसेरा।

धनलक्ष्मी प्रत्येक घर में तभी आएगी,
जब असाक्षरता घर छोड़ कर जाएगी।
शिक्षा द्वारा जब किया जाएगा जन-जन का चरित्र निर्माण,
तभी संभव हो सकेगा संपूर्ण राष्ट्र का कल्याण।

सफलता का आनंद उठा सकेंगे हमारे नयन,
जब प्रत्येक व्यक्ति करेगा ज्ञान का संचयन।
ज्ञान है आधुनिक काल में सर्वाधिक मूल्यवान,
संघर्ष करना होगा, कि हम बन जाएँ विद्वान।

यदि जल हमारे शरीर की प्यास को बुझाता है,
तो ज्ञान हमारी आत्मा को निंद्रा से जगाता है।
शिक्षा-मशाल 'ज्ञानाग्नि' को प्रज्ज्वलित करती है,
और जीयन-राह में आने वाले कष्टों को हरती है।                    

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