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Friday, 25 March 2016

वर्तमान जीवन

इस जीवन में मनःशान्ति का अभाव है। 
एवं तनाव और तृष्णा का प्रभाव है॥ 
यह विश्व अविरल दौड़ में व्यस्त है। 
यह समाज अभी अवसाद-ग्रस्त है॥ १ ॥ 

हम अपनी वास्तविकता से अपरिचित हैं।
खोखले लक्ष्यों पर आधारित, हमारी जीवन-रेखा रचित है॥ 
समय-सरिता का वेग हमें अंध-कूप में धकेल है। 
शंकाओं का राक्षस हमारे साथ खेल खेल रहा है॥ २ ॥ 

जगत की भूल-भूलैया में यह मानव भटक रहा है। 
जीवन के लघु-सुखों पर इसका दिल अटक रहा है॥ 
सत्य का द्वार अभी हमारे अप्रत्यक्ष है। 
तमस-रजस का दुर्ग, अभी हमारे समक्ष है॥ ३ ॥ 

आत्म-दर्शन संभव करेगा, घोर तिमिर में प्रकाश। 
फिर उचित परिश्रम लाएगा, नील असीम आकाश॥ 
ज्ञान एवं विवेक से हमें प्रचुर बल मिलेगा। 
एवं सभी दुविधाओं का उपयुक्त हल मिलेगा॥ ४ ॥      


      
         

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