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Friday, 14 August 2015

आशाएँ

 सं सैंतालीस में मिली भारत माँ को प्रभुता,
प्राप्त हुआ था स्वर्णिम अवसर, कि लिखें नई कविता। 
किन्तु वर्तमान काल में स्थगित हो गयी है प्रगति,
इसके कारणों का उल्लेख मैं करूँगा अभी।

भ्रष्ट नेता भारत माँ का शोषण हैं करते,
और वे लोगों का चैन हैं हरते।
वे अरबों का घपला करते,
और सत्ता के लिए मरते।

जब होगा प्रशासन में सुधार,
तभी संभव होगा जान-उद्धार।
गरीबी अधिक समय तक नहीं टिक पाएगी,
जब शिक्षा घर-घर में आएगी।

आरम्भ हो गयी है इक्कीस्वीं शताब्दी,
किन्तु नियंत्रण में नहीं आई है आबादी।
यही है सभी समस्याओं का मूल कारण,
मिलकर करना होगा हमें इसका निवारण।

हम लोगों की देशभक्ति,
 है हमारी सबसे बड़ी शक्ति।
शपथ लेते हैं हम, कि  लाएँगे नई क्रांति ,
और इस देश में सदैव रहेगी शान्ति।      
   
॥ जय हिन्द ॥ 

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